मुफलिसी संग हो गई है
जिन्दगी जंग हो गई है /
चूल्हे ने हाथ कर दिए खड़े
भूख अब ढंग हो गई है /
बुझा- बुझा हर चेहरा लगता है
महफ़िल बेरंग हो गई है /
बाप-बेटा पी रहे है साथ-साथ
सभ्यता दंग हो गई है /
कह रही है बाज से तू बाज आ
चिड़िया दबंग हो गई है /
शिवा मोहंती पिथोरा
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