Tuesday, 27 December 2011

अरसे बाद आज एक कविता संग्रह पूरा पढ़ पाया / इस आपाधापी के दौर में कोई किताब आपको पढने को मजबूर कर दे इसे लेखक की सफलता कहा जा सकता है / ऐसी ही एक किताब है '' मेरे दिल की बात ''/ छत्तीसगढ़ के वरिष्ठ साहित्यकार स्वराज्य करुणकी कविताओं के संग्रह मेरे दिल की बात में जीवन के प्रत्येक पहलु को बड़ी आत्मीयता से स्पर्श किया गया है / श्रृंगार ,करुणा,व्यंग,विद्रोह सभी तेवर की रचनाएं लेखक की साहित्यिक दक्षता से परिचय कराती है / श्री स्वराज्य करुण का अब तक का जीवन काल रचनात्मक क्रियाकलापों का जीवंत उदहारण है/ हम जैसे रचनाकारों का समय-समय पर उन्होंने मार्ग दर्शक के रूप में साहित्यबोध कराया है / श्री करुण की किताब पर लिखना मेरे लिए साहसिक कार्य करने जैसा है किन्तु मै अपने आप को रोक नहीं पा रहा हूँ /
कविता संग्रहकी पहली रचना रचनाकार की दिल की बात ही है ,लेकिन दूसरी कविता'चांदनी रात का गीत ' अहा: चांदनी की इतनी आत्मिक उपमाएं की मन प्रफुल्लित हो जाता है / बर्फ सी चांदनी,चन्दन सी चांदनी,नई नवेली किसी दुल्हन सी चांदनी , ऐसा लगता है चांदनी को सामने बिठाकर लेखक ने रचना लिखी है / 'नया सवेरा होने तक ','धान के सागर में' इन रचनाओ में लेखक का जीवन के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण झलकता है / ''हम तो चलते जायेंगे नया सवेरा होने तक .....''लेखन का उद्देश्य जाहिर करता है / स्वराज्य भैया ने खेत-खलिहान,ग्रामीण परिवेश का इतना मनोरम दृश्यांकन अपनी कई रचनाओं में किया है की पढ़ते ही हमारे इर्द-गिर्द समूचा ग्राम्य जीवन विचरने लगता है/ कुछ छंद-बद्ध रचनाओं का शब्द सौंदर्य मन को बरबस ही वाह-वाह कहने को विवश कर देता है /'' घोर अमावस को भी पूनम कर दे ऐसा दीप जलाओ -दिया तले का अन्धकार जो हर दे ऐसा दीप जलाओ ''/ श्रृंगार,प्रकृति चित्रण के बीच अचानक एक रचना 'एक है सबके अर्थ इशारे' में लेखक का विद्रोही तेवर खुलकर सामने आता है ;-''ईश्वर तेरे नाम पर ,अल्लाह तेरे नाम पर-जाने क्यों करते है इतना हल्ला तेरे नाम पर '' इन दो पंक्तियों में धार्मिक पाखंड के खिलाफ बेबाकी के साथ की गई टिपण्णी स्वराज्य जी की मूल पहचान है /आज के इस दौर में कबीर की तरह स्पष्टवादिता का साहस रचनाकारों में कहाँ दिखता है; 'फिर भी उस दिन झुलसा क्यूँ मोहल्ला तेरे नाम पर 'संवेदनाओं को झिंझोड़ कर रख देता है / हालाँकि एकाध रचनाओं में मात्राओं को ध्यान में ना रखने के कारण लाइने छोटी बड़ी लगती है लेकिन कविताओं में भावनाएं इतनी प्रबल है की उसे नजरअंदाज किया जा सकता है / लेखक की कुछ रचनाए सीधे मर्म को छूती है और मानस को झकझोर कर रख देती है ;- 'पता नहीं कब आएगा सावन मेरे देश में-अब तो चारो ओर घूमते रावण मेरे देश में '/ इसतरह के बिम्ब चौकाने वाले है और गहरा असर भी करते है /
पिथोरा बहुत छोटी जगह है मुझ जैसे कई रचनाकारों के लिए स्वराज्य करुण की कविताएँ ,उनका तार्किक दृष्टिकोण और विद्रोही तेवर लेखन के लिए मिसाल की भांति होता है / इस किताब में मेरी तलाश लेखक के उसी तेवर की थी जो मिली इन पंक्तियों में ;-पूछ रहे है मंदिर-मस्जिद ,पूछ रहे है काशी-काबा ,रंग बिरंगी इस दुनिया में आखिर कब तक खून खराबा '/ कौन उठाये खतरे बोलो.शिकारी की नजर,गायब आखिर वो पल क्यूँ ,नए जमाने के डाकू आदि कविताएँ विद्रूपताओं पर खुलकर वार करती है / नए रचनाकारों को ये रचनाएँ बेहद पसंद आयेगी / प्यार,श्रृंगार,विरह मिलन के साथ-साथ हास्य व्यंग की रचनाओ से परिपूर्ण यह कविता संग्रह पूर्ण संतुष्टि प्रदान करेगी / लेकिन इस किताब का जो सर्वाधिक महत्वपूर्ण पहलू है वह है मौजूदा समाज की राजनीतिक,सामाजिक एवं आर्थिक व्यवस्था की अराजकता पर खुल्लम-खुल्ला वार / यह तेवर दुष्यंत,अदम गोंडवी के बाद चलन में कमतर होता गया था उसकी भरपाई यह संग्रह कर रही है / डरता हूँ ज्यादा कुछ लिखना छोटी मुह बड़ी बात ना हो जाए / फिर भी कविता और व्यंग कविता को पसंद करने वाले पाठकों और लेखकों को स्वराज्य करुणकी यह कृति ''मेरे दिल की बात '' जरुर-जरुर पढनी चाहिए /
शिवा मोहंती पिथोरा

Sunday, 25 December 2011

Shiva Mohanti
गांधीजी ने हमें सत्य के मार्ग पर चलना सिखाया था
कोई एक गाल में थप्पड़ मारे तो उसे दुसरा दिखाया था
अब तो गांधीवादी भी पथभ्रष्ट हो गए है
सत्य अहिंसा के सारे सिद्धांत नष्ट हो गए है
हिंसा और अनैतिकता की चल रही है पुरवाई
इसीलिए आप लगे रहो मुन्ना भाई .................
गांधीजी ने कम कपडे पहन कर दी थी मितव्ययिता की मिसाल
आधुनिक महिलाओं ने वस्त्र उतार करकर दिया सभ्यता का बुरा हाल
महिलाओं की शर्मोहया खो रही है ,संस्कृति लज्जित हो रही है
फैशन की आड़ में हो रही है नंगाई
इसीलिए आप लगे रहो मुन्ना भाई ..............
गांधीजी मुझे लगता है अभी भी आप, लोगों की यादों में रहते है
तभी तो लोग मज़बूरी का दूसरा नाम ,महात्मा गाँधी कहते है
गांधीजी आपके सपनो के अनुरूप देश ढल नहीं बना हम शर्मिन्दा है
क्युकि आज भी ढेर सारे नाथूराम इस देश में ज़िंदा है
भर्ष्टाचार और सत्ता की हो रही है सगाई
इसीलिए आप लगे रहो मुन्ना भाई .........
गाँधीजी आपने नमक की खातिर दांडी तक पैदल चला था
तब जाकर इस देश में वो काला कानून नमक से टला था
आज देश में नमक तो है पर नमकहलाल बहुत कम है
जिस सांप ने हमें डसा वो हमारे ही आस्तीन में पला था
सुरसा के मुंह की तरह बढ़ रही है देश में महंगाई
इसीलिए आप लगे रहो मुन्ना भाई .............

Tuesday, 20 December 2011

Shiva Mohanti
भ्रस्टाचार मिटा दो जड़ से भारत से हर हाल में
कृपा कीजिये कृपानिधान आने वाले साल में //
किनिमोझी और कलमाड़ी की करतूते है काली
चिदंबरम पूछे तिहाड़ में कमरा है क्या खाली
लाख टके का एक प्रश्न जो ढूंढ़ रहा है उत्तर
जब अपने ही हिंसक हो तो कौन करे रखवाली
कोई निशानी छोड़ ना जाये फिर पवार के गाल में /
भ्रस्टाचार मिटा दो जड़ से भारत से हर हाल में //
मनमोहन जी आप तो अक्सर हो जाते है मौन
तुम्ही बताओ इस संकट को टाले आखिर कौन
अर्थ के ज्ञानी की नादानी झेल रहे है लोग
केवल सत्ता इस्ट हो गया जनता हो गयी गौण
जल बिन मछली जैसी जनता महंगाई के जाल में /
भ्रस्टाचार मिटा दो जड़ से भारत से हर हाल में //
एक अकेले के अनशन में जुट गया सारा देश
विद्रोही तेवर लेकर के उग्र हुआ परिवेश
चोर की दाढ़ी में तिनका सच हो जाता है
लोकपाल से जब डर जाता है खादी गणवेश
ताल ठोक रहे है अन्ना देखो छिहत्तर साल में /
भ्रस्टाचार मिटा दो जड़ से भारत से हर हाल में //
शिवा मोहंती

Tuesday, 22 November 2011

आज काफी दिनों  बाद  मेरा  ब्लॉग खुला / देखे कब तक खुला रहेगा /

Thursday, 3 November 2011

मुफलिसी संग हो गई है  
जिन्दगी जंग हो गई है /
चूल्हे ने हाथ कर दिए खड़े 
भूख अब ढंग हो गई है /
बुझा- बुझा हर चेहरा लगता है 
महफ़िल बेरंग हो गई है / 
बाप-बेटा पी रहे है साथ-साथ 
सभ्यता दंग हो गई है /
कह रही है बाज से तू बाज आ 
चिड़िया दबंग हो गई है /
     शिवा मोहंती पिथोरा 


Tuesday, 1 November 2011

लन्दन  की एक अदालत ने पाकिस्तान क्रिकेट टीम के पूर्व कोच सलमान बट एवं आसिफ अली को मैच -
फिक्सिंग का आरोपी करार दिया है / ऐसा माना जा रहा है कि इस मामले में सलमान बट को लम्बी सजा 
सुनाई जा सकती है /यह संपूर्ण खेल जगत को कलंकित करने वाली घटना है / यह बात पुरी तरह उभर कर 
आई है कि क्रिकेट अब केवल  खेल नहीं रह गया ,बल्कि इसने व्यापार का रूप ले लिया है /हमारे देश में 
क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड जैसी धनी संस्था शायद ही कोई और है / इस खेल और इससे जुड़े खिलाडियों पर जिस 
बेदर्दी से रुपिया लुटाया जा रहा है ,वह भारत जैसे देश के लोगो को हतप्रभ कर देने वाला है / यही वजह 
है कि मैच फिक्सिंग जैसी कई कुरुतियाँ इस खेल में पैठ जमाते जा रही है / अरविन्द केजरीवाल ,किरण 
बेदी और बाबा रामदेव पर लगातार आर्थिक अनियमितताओं के मामले खोद-खोद कर निकालने वाली 
सरकार को इस खेल में देश की जनता के पैसो का दुरूपयोग क्यों नहीं दिखता है ? आने वाले दिनों में 
अगर सरकार ने इस दिशा में ठोस कदम नहीं उठाये तो निश्चित रूप से हमारे देश में भी कई  सलमान बट 
सामने आएंगे और तब हमारे सामने सिवाय लज्जित होने के कोई चारा नहीं बचेगा /
                                                                                                          शिवा मोहंती पिथोरा   

Monday, 31 October 2011

रोज हो रही बस्तर में बमबारी है सरकार
बड़े शान से राज्य में उत्सव जारी है सरकार 
    जाने कितने बेघर हो गए /
    कितने हुए अनाथ //
    युवा पत्नि बिलख रही है /
    छुट गया है साथ // 
उधर है मातम ,इधर राग-दरबारी है सरकार 
बड़े शान से राज्य में उत्सव जारी है सरकार 
       शिवा मोहंती पिथोरा 

Saturday, 29 October 2011

बिजली सरप्लस है ,
और अँधियारा छाया है /
सचमुच इस प्रदेश में ,
राम-राज्य आया है //
      शिवा मोहंती 

बिजली सरप्लस है ,
राम -राज्य आया है /
सचमुच इस प्रदेश में ,
राम-राज्य आया है //
      शिवा मोहंती 

Wednesday, 26 October 2011

es benoor didali me ......

ये कैसा रिवाज है ,
अंधियारे का राज है /
पंछी है सहमे-सहमे से ,
ऊपर उड़ता बाज है //
उपवन में सूनापन है ,और दर्द बहुत है माली में 
दीपक का संघर्ष व्यर्थ है ,इस बेनूर दीवाली  में //
    जहरीले परिवेश में
    जीवन बन गई लाश ,
    हरियाली भयभीत है,
    और बेरंगा पलाश /
पेड़ों का कटना निश्चित है ,दहशत है अब डाली में /
दीपक का संघर्ष व्यर्थ है ,इस बेनूर दीवाली में //
छदम आचरण छदम आवरण ,
और छदम व्यवहार /
सत्ताधारी की पौ बारह 
जनता है लाचार /
राजनीति तब्दील हो गई एक भयंकर गाली में /
दीपक का संघर्ष व्यर्थ है इस बेनूर .................
      संशय के बादल छायें है ,
      दबी- दबी यह चर्चा है /
      आमदनी तो सीमित है ,
      और लम्बा चौड़ा खर्चा है //
कैसे ये त्यौहार मनेगा बोलो तो तंगहाली में,
दीपक का संघर्ष व्यर्थ है इस बेनूर ........... 
              शिवा मोहंती पिथोरा 

Friday, 21 October 2011

हिंसा को बेनूर करे दीवाली में ,
राग-द्वेष सब दूर करे दीवाली में /
उजियारे की खातिर एक -एक दीप जलाकर ,
दर्प तिमिर का चूर  करे दीवाली में /
                   शिवा  मोहंती पिथोरा 

Wednesday, 19 October 2011

छत्तीसगढ़ के बालोद में आयोजित नेत्र शिविर में डाक्टरों की लापरवाही एवं अमानवीयता के चलते आँखों  का
आपरेशन करवाने वाले 3 मरीजो की मौत हो गई और लगभग १५ मरीजो ने अपने आँखों की रौशनी पूरी तरह 
खो दी / यह घटना दुर्भाग्य पूर्ण भी है और मानवता को शर्मसार करने वाला भी/ चिकित्सको के कुशल एवं दक्ष 
हाथो से नेत्र-ज्योति पा लेने का सपना संजोये लोगो को क्या मालूम कि दरअसल वो क्रूर एवं जालिम हाथ थे /
प्रशासनिक स्तर पर जाँच ,दोषियों पर कार्यवाही जैसे खानापूर्ति प्रारंभ तो कर दी गई है किन्तु उन संवेदन -
हीन डाक्टरों पर सख्त कार्यवाही अनिवार्य रूप से कि जाये ताकि भविष्य में इस तरह कि अमानवीय घटनाओ 
कि पुनरावृत्ति ना हो 
                                शिवा मोहंती पिथोरा 

Tuesday, 18 October 2011

baba ramdev

योग से सुन्दर तन लायेंगे बाबा रामदेव 
निश्छल कोमल मन लायेंगे बाबा रामदेव 
अब तो यारो मिट जाएगी निर्धनता इस देश से 
स्विस-बैंक से धन लायेंगे बाबा रामदेव /

Monday, 17 October 2011

हिसार उपचुनाव में अखिल भारतीय कांग्रेस पार्टी के उम्मीदवार जयप्रकाश की शर्मनाक पराजय आखिरकार
हो ही गई / शर्मनाक इसलिए कि उनकी जमानत जब्त हो गई / ऐसा माना जा रहा है कि कांग्रेस कि इस दुर्गति 
का प्रमुख कारण टीम अन्ना द्वारा कांग्रेस के खिलाफ  किया गया प्रचार है / देश की अवाम ने फिर से यह साबित 
किया है कि उन्हें जनलोकपाल बिल चाहिए ही चाहिए / कांग्रेस के आला नेतृत्व को गंभीरता से इस बात पर 
विचार करना चाहिए कि आने वाले समय में पांच राज्यों में चुनाव होने वाले है ,लिहाजा संसद के शीतकालीन 
सत्र में जनलोकपाल बिल पास करने के लिए ठोस एवं कारगर पहल करे ,अन्यथा अन्ना का भूत उनके पीछे 
पड़ा ही रहेगा / 
                      शिवा मोहंती पिथोरा     

Sunday, 16 October 2011

आरंग से सराईपाली तक एन .एच .५३ के खस्ता-हाल पर राज्य के लोक निर्माण मंत्री श्री बृजमोहन अग्रवाल का इन दिनों लगातार बयान आ रहा है कि अडवाणी जी के रथयात्रा के पूर्व सड़क को दुरुस्त कर लिया जायेगा / यह आम जनता को आहत करने वाला बयान है / इस लिहाज से कि पिछले ३ महीनो से अंचल की जनता लगातार इस सम्बन्ध में शासन-प्रशासन का ध्यान आक्रिस्ट करा रही है /सराईपाली बंद जैसे आयोजन भी वंहा के नागरिक परेशान होकर कर चुके है / तब विभाग के आला अफसर ने फंड न होने का हवाला देकर मार्ग दुरुस्त करने में असमर्थता व्यक्त की थी /लेकिन अडवाणी जी की रथयात्रा के मद्दे नजर पूरे प्रशासन का चौकस हो जाना यह साबित करता की उक्त अधिकारी का  फंड के अभाव का रोना रोना जनता के साथ छल था और शासन में भी उस सड़क को बनाने की संवेदनशीलता नहीं थी / लोकतंत्र में जनभावनाओ को सर्वोपरी मानने का दावा कितना खोखला है इसका जीता जागता मिसाल है ''एन.एच .५३''/    बहरहाल रथयात्रा के लिए अंचलवासियो की तरफ से अडवाणी जी का आभार ................
                                                                          शिवा मोहंती पिथोरा  
    

Friday, 14 October 2011

N H 53.................

नेता जी की तनी है भौहें ,
परसेंटेज है कम ,
जाँच हुई तो पोल खुलेगी ,
अफसर को है गम /
डामर अल्पसंख्यक हो गया ,गिट्टी-मुरम में तनातनी है 
कितनी घटिया सड़क बनी है .............
गड्ढे और गेटर के इसमे ,
जगह-जगह पैबंद 
अब तो पगडण्डी में चलना 
करते लोग पसंद 
राहगीरों को लगती ऐसे जैसे कोई नागफनी है 
कितनी घटिया सड़क बनी है ...............
रश्ते पर हिचकोले खाएं 
धुल युक्त हो गयी फिजायें 
मैना [विमान] है सरकार की खातिर 
जनता चाहे भाड़ में जाये 
जनता के अधिकारों पर ,यह सरकारी राहजनी है 
कितनी घटिया सड़क बनी है ............
पथ की चिंता नहीं किसी को ,
रथ की चिंता है ,
अब तो पूरा अमला एक-एक 
दिन को गिनता है 
महारथी रथ में आएंगे ,गर्दन पर तलवार तनी है 
कितनी घटिया सड़क बनी है ...........
इसके बनने का भी यारो 
एक अलग ही किस्सा है 
अफसर से लेकर मंत्री तक 
सबका इसमे हिस्सा है 
शेर के खूनी पंजे में घायल जैसे एक हिरनी है 
कितनी घटिया सड़क बनी है ..........

Thursday, 13 October 2011

सुप्रीम कोर्ट के सीनियर वकील एवं टीम अन्ना के वरिष्ठ सदस्य प्रशांत  भूषण के केबिन में घुसकर मार-पीट की 
घटना निंदनीय है /किसी बात पर असहमति अपनी जगह सही है ,लेकिन इस तरह कानून को अपने हाथ में लेना असंवैधानिक भी है और गुंडा-गर्दी भी/भगतसिंह क्रांति-सेना के सदस्यों का यह व्यवहार भर्त्सना योग्य है /बहरहाल इसके दूसरे पहलू पर गौर करना भी जरूरी है / हमारे देश में अभिव्यक्ति की आज़ादी है ,लेकिन राष्ट्रीय भावना से जुड़ा कोई मसला हो तो उस पर विपरीत टिपण्णी करना बुद्धिमानी नहीं है/ कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है यह हमारे देश की जन-जन की भावना है /अतः इसे भारत से अलग करने की अभिव्यक्ति प्रशांत-भूषण के 
साथ घटी घटना को आमंत्रण देने जैसा ही है /दोनों पक्षों  को इस और ध्यान देना देश की एकता और अखंडता के लिए लाजिम होगा / 

Tuesday, 11 October 2011

शरद -पूर्णिमा की हार्दिक बधाई .......
''नैतिकता और मानवता कभी न हो कमजोर 
स्वाति की एक बूंद की खातिर तरसे न चकोर 
आस्थाओं का खीर पकाकर तुमसे करे गुहार 
शरद-पर्व पर रस बरसा दो भगवन चारो ओर ''
                                   
                                           शिवा मोहंती 

Monday, 10 October 2011

गजल  को संजीदगी से पसंद करने वालो  ने अपनी तन्हाई का एक साथी खो  दिया.
जगजीत सिंग संगीत के क्षेत्र में एक प्रतिष्ठित नाम है .उनका असामयिक निधन 
संगीत जगत के लिए अपूरणीय क्षति  है.उन्हें मेरी विनम्र श्रद्धांजली...............
   '' चिट्ठी   ना   कोई  सन्देश 
    जाने   वो   कौन  सा  देश  
    जहां   तुम   चले  गए   .......

Saturday, 8 October 2011

बस्तर के सीने में नश्तर गडा हुआ है यार 
पंजाब ,सिंध ,गुजरात ,मराठा सबके-सब लाचार 
ओबेरॉय और ताज जला दी दहशत-गर्दों ने 
डरा-डरा और सहमा-सहमा लगता क़ुतुब-मीनार 

Wednesday, 5 October 2011

सचमुच किसी मृगतृष्णा के समान ही है ' दशहरे  में रावण के पुतले का जलना ' 
हमें लगता है /असत्य पे सत्य की जीत हो गई / बुराइयों का अंत हो गया /
लेकिन ,दुसरे ही दिन  सदभावनाओं से  जब हमारा  स्वार्थ फिर से  बड़ा हो 
जाता है /
एक नया रावण हमारे सामने दुबारा  खड़ा  हो जाता है 
                                                                            shiva mohanti
                                                                     shiva.pithora@gmail.com
                                                                      09425521327

Tuesday, 4 October 2011

आस्थाए हो रही है है खंडित माता जगदम्बे 
सत्य व्यथित है और है दण्डित माता जगदम्बे
अब तो काली बनकर तुमको आना ही होगा 
महिसासुर है महिमामंडित  माता जगदम्बे