अरसे बाद आज एक कविता संग्रह पूरा पढ़ पाया / इस आपाधापी के दौर में कोई किताब आपको पढने को मजबूर कर दे इसे लेखक की सफलता कहा जा सकता है / ऐसी ही एक किताब है '' मेरे दिल की बात ''/ छत्तीसगढ़ के वरिष्ठ साहित्यकार स्वराज्य करुणकी कविताओं के संग्रह मेरे दिल की बात में जीवन के प्रत्येक पहलु को बड़ी आत्मीयता से स्पर्श किया गया है / श्रृंगार ,करुणा,व्यंग,विद्रोह सभी तेवर की रचनाएं लेखक की साहित्यिक दक्षता से परिचय कराती है / श्री स्वराज्य करुण का अब तक का जीवन काल रचनात्मक क्रियाकलापों का जीवंत उदहारण है/ हम जैसे रचनाकारों का समय-समय पर उन्होंने मार्ग दर्शक के रूप में साहित्यबोध कराया है / श्री करुण की किताब पर लिखना मेरे लिए साहसिक कार्य करने जैसा है किन्तु मै अपने आप को रोक नहीं पा रहा हूँ /
कविता संग्रहकी पहली रचना रचनाकार की दिल की बात ही है ,लेकिन दूसरी कविता'चांदनी रात का गीत ' अहा: चांदनी की इतनी आत्मिक उपमाएं की मन प्रफुल्लित हो जाता है / बर्फ सी चांदनी,चन्दन सी चांदनी,नई नवेली किसी दुल्हन सी चांदनी , ऐसा लगता है चांदनी को सामने बिठाकर लेखक ने रचना लिखी है / 'नया सवेरा होने तक ','धान के सागर में' इन रचनाओ में लेखक का जीवन के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण झलकता है / ''हम तो चलते जायेंगे नया सवेरा होने तक .....''लेखन का उद्देश्य जाहिर करता है / स्वराज्य भैया ने खेत-खलिहान,ग्रामीण परिवेश का इतना मनोरम दृश्यांकन अपनी कई रचनाओं में किया है की पढ़ते ही हमारे इर्द-गिर्द समूचा ग्राम्य जीवन विचरने लगता है/ कुछ छंद-बद्ध रचनाओं का शब्द सौंदर्य मन को बरबस ही वाह-वाह कहने को विवश कर देता है /'' घोर अमावस को भी पूनम कर दे ऐसा दीप जलाओ -दिया तले का अन्धकार जो हर दे ऐसा दीप जलाओ ''/ श्रृंगार,प्रकृति चित्रण के बीच अचानक एक रचना 'एक है सबके अर्थ इशारे' में लेखक का विद्रोही तेवर खुलकर सामने आता है ;-''ईश्वर तेरे नाम पर ,अल्लाह तेरे नाम पर-जाने क्यों करते है इतना हल्ला तेरे नाम पर '' इन दो पंक्तियों में धार्मिक पाखंड के खिलाफ बेबाकी के साथ की गई टिपण्णी स्वराज्य जी की मूल पहचान है /आज के इस दौर में कबीर की तरह स्पष्टवादिता का साहस रचनाकारों में कहाँ दिखता है; 'फिर भी उस दिन झुलसा क्यूँ मोहल्ला तेरे नाम पर 'संवेदनाओं को झिंझोड़ कर रख देता है / हालाँकि एकाध रचनाओं में मात्राओं को ध्यान में ना रखने के कारण लाइने छोटी बड़ी लगती है लेकिन कविताओं में भावनाएं इतनी प्रबल है की उसे नजरअंदाज किया जा सकता है / लेखक की कुछ रचनाए सीधे मर्म को छूती है और मानस को झकझोर कर रख देती है ;- 'पता नहीं कब आएगा सावन मेरे देश में-अब तो चारो ओर घूमते रावण मेरे देश में '/ इसतरह के बिम्ब चौकाने वाले है और गहरा असर भी करते है /
पिथोरा बहुत छोटी जगह है मुझ जैसे कई रचनाकारों के लिए स्वराज्य करुण की कविताएँ ,उनका तार्किक दृष्टिकोण और विद्रोही तेवर लेखन के लिए मिसाल की भांति होता है / इस किताब में मेरी तलाश लेखक के उसी तेवर की थी जो मिली इन पंक्तियों में ;-पूछ रहे है मंदिर-मस्जिद ,पूछ रहे है काशी-काबा ,रंग बिरंगी इस दुनिया में आखिर कब तक खून खराबा '/ कौन उठाये खतरे बोलो.शिकारी की नजर,गायब आखिर वो पल क्यूँ ,नए जमाने के डाकू आदि कविताएँ विद्रूपताओं पर खुलकर वार करती है / नए रचनाकारों को ये रचनाएँ बेहद पसंद आयेगी / प्यार,श्रृंगार,विरह मिलन के साथ-साथ हास्य व्यंग की रचनाओ से परिपूर्ण यह कविता संग्रह पूर्ण संतुष्टि प्रदान करेगी / लेकिन इस किताब का जो सर्वाधिक महत्वपूर्ण पहलू है वह है मौजूदा समाज की राजनीतिक,सामाजिक एवं आर्थिक व्यवस्था की अराजकता पर खुल्लम-खुल्ला वार / यह तेवर दुष्यंत,अदम गोंडवी के बाद चलन में कमतर होता गया था उसकी भरपाई यह संग्रह कर रही है / डरता हूँ ज्यादा कुछ लिखना छोटी मुह बड़ी बात ना हो जाए / फिर भी कविता और व्यंग कविता को पसंद करने वाले पाठकों और लेखकों को स्वराज्य करुणकी यह कृति ''मेरे दिल की बात '' जरुर-जरुर पढनी चाहिए /
शिवा मोहंती पिथोरा
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