मजहबी पंडो ने बोया उन्माद
कटुता के खेत में हिंसा का खाद
लहलहा रही है नफरत की फसलें
दया,प्रेम,मानवता करे आर्तनाद
दूषित परिवेश है भयभीत भाईचारा
स्वागत है आपका दो हजार बारह[२०१२]
शिवा मोहंती पिथोरा
SANKALP
Monday, 2 January 2012
Tuesday, 27 December 2011
अरसे बाद आज एक कविता संग्रह पूरा पढ़ पाया / इस आपाधापी के दौर में कोई किताब आपको पढने को मजबूर कर दे इसे लेखक की सफलता कहा जा सकता है / ऐसी ही एक किताब है '' मेरे दिल की बात ''/ छत्तीसगढ़ के वरिष्ठ साहित्यकार स्वराज्य करुणकी कविताओं के संग्रह मेरे दिल की बात में जीवन के प्रत्येक पहलु को बड़ी आत्मीयता से स्पर्श किया गया है / श्रृंगार ,करुणा,व्यंग,विद्रोह सभी तेवर की रचनाएं लेखक की साहित्यिक दक्षता से परिचय कराती है / श्री स्वराज्य करुण का अब तक का जीवन काल रचनात्मक क्रियाकलापों का जीवंत उदहारण है/ हम जैसे रचनाकारों का समय-समय पर उन्होंने मार्ग दर्शक के रूप में साहित्यबोध कराया है / श्री करुण की किताब पर लिखना मेरे लिए साहसिक कार्य करने जैसा है किन्तु मै अपने आप को रोक नहीं पा रहा हूँ /
कविता संग्रहकी पहली रचना रचनाकार की दिल की बात ही है ,लेकिन दूसरी कविता'चांदनी रात का गीत ' अहा: चांदनी की इतनी आत्मिक उपमाएं की मन प्रफुल्लित हो जाता है / बर्फ सी चांदनी,चन्दन सी चांदनी,नई नवेली किसी दुल्हन सी चांदनी , ऐसा लगता है चांदनी को सामने बिठाकर लेखक ने रचना लिखी है / 'नया सवेरा होने तक ','धान के सागर में' इन रचनाओ में लेखक का जीवन के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण झलकता है / ''हम तो चलते जायेंगे नया सवेरा होने तक .....''लेखन का उद्देश्य जाहिर करता है / स्वराज्य भैया ने खेत-खलिहान,ग्रामीण परिवेश का इतना मनोरम दृश्यांकन अपनी कई रचनाओं में किया है की पढ़ते ही हमारे इर्द-गिर्द समूचा ग्राम्य जीवन विचरने लगता है/ कुछ छंद-बद्ध रचनाओं का शब्द सौंदर्य मन को बरबस ही वाह-वाह कहने को विवश कर देता है /'' घोर अमावस को भी पूनम कर दे ऐसा दीप जलाओ -दिया तले का अन्धकार जो हर दे ऐसा दीप जलाओ ''/ श्रृंगार,प्रकृति चित्रण के बीच अचानक एक रचना 'एक है सबके अर्थ इशारे' में लेखक का विद्रोही तेवर खुलकर सामने आता है ;-''ईश्वर तेरे नाम पर ,अल्लाह तेरे नाम पर-जाने क्यों करते है इतना हल्ला तेरे नाम पर '' इन दो पंक्तियों में धार्मिक पाखंड के खिलाफ बेबाकी के साथ की गई टिपण्णी स्वराज्य जी की मूल पहचान है /आज के इस दौर में कबीर की तरह स्पष्टवादिता का साहस रचनाकारों में कहाँ दिखता है; 'फिर भी उस दिन झुलसा क्यूँ मोहल्ला तेरे नाम पर 'संवेदनाओं को झिंझोड़ कर रख देता है / हालाँकि एकाध रचनाओं में मात्राओं को ध्यान में ना रखने के कारण लाइने छोटी बड़ी लगती है लेकिन कविताओं में भावनाएं इतनी प्रबल है की उसे नजरअंदाज किया जा सकता है / लेखक की कुछ रचनाए सीधे मर्म को छूती है और मानस को झकझोर कर रख देती है ;- 'पता नहीं कब आएगा सावन मेरे देश में-अब तो चारो ओर घूमते रावण मेरे देश में '/ इसतरह के बिम्ब चौकाने वाले है और गहरा असर भी करते है /
पिथोरा बहुत छोटी जगह है मुझ जैसे कई रचनाकारों के लिए स्वराज्य करुण की कविताएँ ,उनका तार्किक दृष्टिकोण और विद्रोही तेवर लेखन के लिए मिसाल की भांति होता है / इस किताब में मेरी तलाश लेखक के उसी तेवर की थी जो मिली इन पंक्तियों में ;-पूछ रहे है मंदिर-मस्जिद ,पूछ रहे है काशी-काबा ,रंग बिरंगी इस दुनिया में आखिर कब तक खून खराबा '/ कौन उठाये खतरे बोलो.शिकारी की नजर,गायब आखिर वो पल क्यूँ ,नए जमाने के डाकू आदि कविताएँ विद्रूपताओं पर खुलकर वार करती है / नए रचनाकारों को ये रचनाएँ बेहद पसंद आयेगी / प्यार,श्रृंगार,विरह मिलन के साथ-साथ हास्य व्यंग की रचनाओ से परिपूर्ण यह कविता संग्रह पूर्ण संतुष्टि प्रदान करेगी / लेकिन इस किताब का जो सर्वाधिक महत्वपूर्ण पहलू है वह है मौजूदा समाज की राजनीतिक,सामाजिक एवं आर्थिक व्यवस्था की अराजकता पर खुल्लम-खुल्ला वार / यह तेवर दुष्यंत,अदम गोंडवी के बाद चलन में कमतर होता गया था उसकी भरपाई यह संग्रह कर रही है / डरता हूँ ज्यादा कुछ लिखना छोटी मुह बड़ी बात ना हो जाए / फिर भी कविता और व्यंग कविता को पसंद करने वाले पाठकों और लेखकों को स्वराज्य करुणकी यह कृति ''मेरे दिल की बात '' जरुर-जरुर पढनी चाहिए /
शिवा मोहंती पिथोरा
कविता संग्रहकी पहली रचना रचनाकार की दिल की बात ही है ,लेकिन दूसरी कविता'चांदनी रात का गीत ' अहा: चांदनी की इतनी आत्मिक उपमाएं की मन प्रफुल्लित हो जाता है / बर्फ सी चांदनी,चन्दन सी चांदनी,नई नवेली किसी दुल्हन सी चांदनी , ऐसा लगता है चांदनी को सामने बिठाकर लेखक ने रचना लिखी है / 'नया सवेरा होने तक ','धान के सागर में' इन रचनाओ में लेखक का जीवन के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण झलकता है / ''हम तो चलते जायेंगे नया सवेरा होने तक .....''लेखन का उद्देश्य जाहिर करता है / स्वराज्य भैया ने खेत-खलिहान,ग्रामीण परिवेश का इतना मनोरम दृश्यांकन अपनी कई रचनाओं में किया है की पढ़ते ही हमारे इर्द-गिर्द समूचा ग्राम्य जीवन विचरने लगता है/ कुछ छंद-बद्ध रचनाओं का शब्द सौंदर्य मन को बरबस ही वाह-वाह कहने को विवश कर देता है /'' घोर अमावस को भी पूनम कर दे ऐसा दीप जलाओ -दिया तले का अन्धकार जो हर दे ऐसा दीप जलाओ ''/ श्रृंगार,प्रकृति चित्रण के बीच अचानक एक रचना 'एक है सबके अर्थ इशारे' में लेखक का विद्रोही तेवर खुलकर सामने आता है ;-''ईश्वर तेरे नाम पर ,अल्लाह तेरे नाम पर-जाने क्यों करते है इतना हल्ला तेरे नाम पर '' इन दो पंक्तियों में धार्मिक पाखंड के खिलाफ बेबाकी के साथ की गई टिपण्णी स्वराज्य जी की मूल पहचान है /आज के इस दौर में कबीर की तरह स्पष्टवादिता का साहस रचनाकारों में कहाँ दिखता है; 'फिर भी उस दिन झुलसा क्यूँ मोहल्ला तेरे नाम पर 'संवेदनाओं को झिंझोड़ कर रख देता है / हालाँकि एकाध रचनाओं में मात्राओं को ध्यान में ना रखने के कारण लाइने छोटी बड़ी लगती है लेकिन कविताओं में भावनाएं इतनी प्रबल है की उसे नजरअंदाज किया जा सकता है / लेखक की कुछ रचनाए सीधे मर्म को छूती है और मानस को झकझोर कर रख देती है ;- 'पता नहीं कब आएगा सावन मेरे देश में-अब तो चारो ओर घूमते रावण मेरे देश में '/ इसतरह के बिम्ब चौकाने वाले है और गहरा असर भी करते है /
पिथोरा बहुत छोटी जगह है मुझ जैसे कई रचनाकारों के लिए स्वराज्य करुण की कविताएँ ,उनका तार्किक दृष्टिकोण और विद्रोही तेवर लेखन के लिए मिसाल की भांति होता है / इस किताब में मेरी तलाश लेखक के उसी तेवर की थी जो मिली इन पंक्तियों में ;-पूछ रहे है मंदिर-मस्जिद ,पूछ रहे है काशी-काबा ,रंग बिरंगी इस दुनिया में आखिर कब तक खून खराबा '/ कौन उठाये खतरे बोलो.शिकारी की नजर,गायब आखिर वो पल क्यूँ ,नए जमाने के डाकू आदि कविताएँ विद्रूपताओं पर खुलकर वार करती है / नए रचनाकारों को ये रचनाएँ बेहद पसंद आयेगी / प्यार,श्रृंगार,विरह मिलन के साथ-साथ हास्य व्यंग की रचनाओ से परिपूर्ण यह कविता संग्रह पूर्ण संतुष्टि प्रदान करेगी / लेकिन इस किताब का जो सर्वाधिक महत्वपूर्ण पहलू है वह है मौजूदा समाज की राजनीतिक,सामाजिक एवं आर्थिक व्यवस्था की अराजकता पर खुल्लम-खुल्ला वार / यह तेवर दुष्यंत,अदम गोंडवी के बाद चलन में कमतर होता गया था उसकी भरपाई यह संग्रह कर रही है / डरता हूँ ज्यादा कुछ लिखना छोटी मुह बड़ी बात ना हो जाए / फिर भी कविता और व्यंग कविता को पसंद करने वाले पाठकों और लेखकों को स्वराज्य करुणकी यह कृति ''मेरे दिल की बात '' जरुर-जरुर पढनी चाहिए /
शिवा मोहंती पिथोरा
Sunday, 25 December 2011
Shiva Mohanti
गांधीजी ने हमें सत्य के मार्ग पर चलना सिखाया था
कोई एक गाल में थप्पड़ मारे तो उसे दुसरा दिखाया था
अब तो गांधीवादी भी पथभ्रष्ट हो गए है
सत्य अहिंसा के सारे सिद्धांत नष्ट हो गए है
हिंसा और अनैतिकता की चल रही है पुरवाई
इसीलिए आप लगे रहो मुन्ना भाई .................
गांधीजी ने कम कपडे पहन कर दी थी मितव्ययिता की मिसाल
आधुनिक महिलाओं ने वस्त्र उतार करकर दिया सभ्यता का बुरा हाल
महिलाओं की शर्मोहया खो रही है ,संस्कृति लज्जित हो रही है
फैशन की आड़ में हो रही है नंगाई
इसीलिए आप लगे रहो मुन्ना भाई ..............
गांधीजी मुझे लगता है अभी भी आप, लोगों की यादों में रहते है
तभी तो लोग मज़बूरी का दूसरा नाम ,महात्मा गाँधी कहते है
गांधीजी आपके सपनो के अनुरूप देश ढल नहीं बना हम शर्मिन्दा है
क्युकि आज भी ढेर सारे नाथूराम इस देश में ज़िंदा है
भर्ष्टाचार और सत्ता की हो रही है सगाई
इसीलिए आप लगे रहो मुन्ना भाई .........
गाँधीजी आपने नमक की खातिर दांडी तक पैदल चला था
तब जाकर इस देश में वो काला कानून नमक से टला था
आज देश में नमक तो है पर नमकहलाल बहुत कम है
जिस सांप ने हमें डसा वो हमारे ही आस्तीन में पला था
सुरसा के मुंह की तरह बढ़ रही है देश में महंगाई
इसीलिए आप लगे रहो मुन्ना भाई .............
गांधीजी ने हमें सत्य के मार्ग पर चलना सिखाया था
कोई एक गाल में थप्पड़ मारे तो उसे दुसरा दिखाया था
अब तो गांधीवादी भी पथभ्रष्ट हो गए है
सत्य अहिंसा के सारे सिद्धांत नष्ट हो गए है
हिंसा और अनैतिकता की चल रही है पुरवाई
इसीलिए आप लगे रहो मुन्ना भाई .................
गांधीजी ने कम कपडे पहन कर दी थी मितव्ययिता की मिसाल
आधुनिक महिलाओं ने वस्त्र उतार करकर दिया सभ्यता का बुरा हाल
महिलाओं की शर्मोहया खो रही है ,संस्कृति लज्जित हो रही है
फैशन की आड़ में हो रही है नंगाई
इसीलिए आप लगे रहो मुन्ना भाई ..............
गांधीजी मुझे लगता है अभी भी आप, लोगों की यादों में रहते है
तभी तो लोग मज़बूरी का दूसरा नाम ,महात्मा गाँधी कहते है
गांधीजी आपके सपनो के अनुरूप देश ढल नहीं बना हम शर्मिन्दा है
क्युकि आज भी ढेर सारे नाथूराम इस देश में ज़िंदा है
भर्ष्टाचार और सत्ता की हो रही है सगाई
इसीलिए आप लगे रहो मुन्ना भाई .........
गाँधीजी आपने नमक की खातिर दांडी तक पैदल चला था
तब जाकर इस देश में वो काला कानून नमक से टला था
आज देश में नमक तो है पर नमकहलाल बहुत कम है
जिस सांप ने हमें डसा वो हमारे ही आस्तीन में पला था
सुरसा के मुंह की तरह बढ़ रही है देश में महंगाई
इसीलिए आप लगे रहो मुन्ना भाई .............
Tuesday, 20 December 2011
Shiva Mohanti
भ्रस्टाचार मिटा दो जड़ से भारत से हर हाल में
कृपा कीजिये कृपानिधान आने वाले साल में //
किनिमोझी और कलमाड़ी की करतूते है काली
चिदंबरम पूछे तिहाड़ में कमरा है क्या खाली
लाख टके का एक प्रश्न जो ढूंढ़ रहा है उत्तर
जब अपने ही हिंसक हो तो कौन करे रखवाली
कोई निशानी छोड़ ना जाये फिर पवार के गाल में /
भ्रस्टाचार मिटा दो जड़ से भारत से हर हाल में //
मनमोहन जी आप तो अक्सर हो जाते है मौन
तुम्ही बताओ इस संकट को टाले आखिर कौन
अर्थ के ज्ञानी की नादानी झेल रहे है लोग
केवल सत्ता इस्ट हो गया जनता हो गयी गौण
जल बिन मछली जैसी जनता महंगाई के जाल में /
भ्रस्टाचार मिटा दो जड़ से भारत से हर हाल में //
एक अकेले के अनशन में जुट गया सारा देश
विद्रोही तेवर लेकर के उग्र हुआ परिवेश
चोर की दाढ़ी में तिनका सच हो जाता है
लोकपाल से जब डर जाता है खादी गणवेश
ताल ठोक रहे है अन्ना देखो छिहत्तर साल में /
भ्रस्टाचार मिटा दो जड़ से भारत से हर हाल में //
शिवा मोहंती
भ्रस्टाचार मिटा दो जड़ से भारत से हर हाल में
कृपा कीजिये कृपानिधान आने वाले साल में //
किनिमोझी और कलमाड़ी की करतूते है काली
चिदंबरम पूछे तिहाड़ में कमरा है क्या खाली
लाख टके का एक प्रश्न जो ढूंढ़ रहा है उत्तर
जब अपने ही हिंसक हो तो कौन करे रखवाली
कोई निशानी छोड़ ना जाये फिर पवार के गाल में /
भ्रस्टाचार मिटा दो जड़ से भारत से हर हाल में //
मनमोहन जी आप तो अक्सर हो जाते है मौन
तुम्ही बताओ इस संकट को टाले आखिर कौन
अर्थ के ज्ञानी की नादानी झेल रहे है लोग
केवल सत्ता इस्ट हो गया जनता हो गयी गौण
जल बिन मछली जैसी जनता महंगाई के जाल में /
भ्रस्टाचार मिटा दो जड़ से भारत से हर हाल में //
एक अकेले के अनशन में जुट गया सारा देश
विद्रोही तेवर लेकर के उग्र हुआ परिवेश
चोर की दाढ़ी में तिनका सच हो जाता है
लोकपाल से जब डर जाता है खादी गणवेश
ताल ठोक रहे है अन्ना देखो छिहत्तर साल में /
भ्रस्टाचार मिटा दो जड़ से भारत से हर हाल में //
शिवा मोहंती
Thursday, 3 November 2011
Tuesday, 1 November 2011
लन्दन की एक अदालत ने पाकिस्तान क्रिकेट टीम के पूर्व कोच सलमान बट एवं आसिफ अली को मैच -
फिक्सिंग का आरोपी करार दिया है / ऐसा माना जा रहा है कि इस मामले में सलमान बट को लम्बी सजा
सुनाई जा सकती है /यह संपूर्ण खेल जगत को कलंकित करने वाली घटना है / यह बात पुरी तरह उभर कर
आई है कि क्रिकेट अब केवल खेल नहीं रह गया ,बल्कि इसने व्यापार का रूप ले लिया है /हमारे देश में
क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड जैसी धनी संस्था शायद ही कोई और है / इस खेल और इससे जुड़े खिलाडियों पर जिस
बेदर्दी से रुपिया लुटाया जा रहा है ,वह भारत जैसे देश के लोगो को हतप्रभ कर देने वाला है / यही वजह
है कि मैच फिक्सिंग जैसी कई कुरुतियाँ इस खेल में पैठ जमाते जा रही है / अरविन्द केजरीवाल ,किरण
बेदी और बाबा रामदेव पर लगातार आर्थिक अनियमितताओं के मामले खोद-खोद कर निकालने वाली
सरकार को इस खेल में देश की जनता के पैसो का दुरूपयोग क्यों नहीं दिखता है ? आने वाले दिनों में
अगर सरकार ने इस दिशा में ठोस कदम नहीं उठाये तो निश्चित रूप से हमारे देश में भी कई सलमान बट
सामने आएंगे और तब हमारे सामने सिवाय लज्जित होने के कोई चारा नहीं बचेगा /
शिवा मोहंती पिथोरा
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