Friday, 14 October 2011

N H 53.................

नेता जी की तनी है भौहें ,
परसेंटेज है कम ,
जाँच हुई तो पोल खुलेगी ,
अफसर को है गम /
डामर अल्पसंख्यक हो गया ,गिट्टी-मुरम में तनातनी है 
कितनी घटिया सड़क बनी है .............
गड्ढे और गेटर के इसमे ,
जगह-जगह पैबंद 
अब तो पगडण्डी में चलना 
करते लोग पसंद 
राहगीरों को लगती ऐसे जैसे कोई नागफनी है 
कितनी घटिया सड़क बनी है ...............
रश्ते पर हिचकोले खाएं 
धुल युक्त हो गयी फिजायें 
मैना [विमान] है सरकार की खातिर 
जनता चाहे भाड़ में जाये 
जनता के अधिकारों पर ,यह सरकारी राहजनी है 
कितनी घटिया सड़क बनी है ............
पथ की चिंता नहीं किसी को ,
रथ की चिंता है ,
अब तो पूरा अमला एक-एक 
दिन को गिनता है 
महारथी रथ में आएंगे ,गर्दन पर तलवार तनी है 
कितनी घटिया सड़क बनी है ...........
इसके बनने का भी यारो 
एक अलग ही किस्सा है 
अफसर से लेकर मंत्री तक 
सबका इसमे हिस्सा है 
शेर के खूनी पंजे में घायल जैसे एक हिरनी है 
कितनी घटिया सड़क बनी है ..........

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